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आचार्य/आचार्यो : अतुल शास्त्री जी
 
अनुभव:
शिक्षा:
स्थाई पता:
संपर्क सूत्र:
   ज्योतिष सेवा केंद्र
10 साल
महर्षि वेद ज्ञान विश्व विद्यापीठम् छतरपुर, ज्योतिष शिक्षा सम्पूर्णानन्द विश्वविद्यालय काशी
2, अग्रवाल कम्पाउंड, क्वारी रोड, महाराष्ट्र, नगर भंडुप, (प.) मुंबई  
  +91 9821-608066, 9821-608067(What'sapp no).
email:  researchastroindia@gmail.com  
परिचय-:

ज्योतिषाचार्य पंडित अतुल शास्त्री जी का जन्म मई 1992 में अवध धाम, उत्तर प्रदेश में हुआ है। ब्राह्मण परिवार के संस्कारगत आचरण के कारण बालपन से ही अतुल जी का सम्बन्ध ज्योतिष से रहा। यही वजह है कि इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए आपने महर्षि वेद विज्ञान विश्व विद्यापीठम् - छतरपुर गुरुकुल से ज्योतिष एवं कर्मकांड की प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण की। ततपश्चात काशी प्रांत के सम्पूर्णानन्द विश्वविद्यालय से ज्योतिष की उच्च शिक्षा ग्रहण की।

अतुल जी ने अवध के साथ लखनऊ, इलाहबाद, बनारस तथा गोंडा में कुछ दिन गुज़ारे और अपनी ज्योतिष सेवा केंद्र का प्रचार प्रसार किया किया। उत्तर प्रदेश में पैर जमाने के बाद आचार्य जी गुजरात के शहर सूरत में आकर बस गए। यहां अतुल जी 2 साल रहे और ज्योतिष सेवा केंद्र की स्थापना कर सूरत वासियों की समस्याएं हल की। सूरत वासियों के दिल में अपनी जगह बनाने के बाद वर्ष 2012 में अतुल जी मुम्बई आ गए और यहां ज्योतिष सेवा केंद्र की स्थापना की।

वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश सहित गुजरात, मध्य प्रदेश तथा मुम्बई में अतुल जी की ज्योतिष सेवा केंद्र की कई संस्थाएं फल फूल रही हैं। कर्मकांड एवं ज्योतिष का कार्य करते हुए अतुल जी कई लोगों का भाग्य संवार रहे हैं। पँ अतुल शास्त्री पँ बाबा महाकाल की कृपा है और भैरव कृपा है जो कुछ है वो इन्हे और अपने माता पिता का आर्शिवाद मानते है

24 वर्ष की छोटी सी उम्र में आचार्य जी ने वह कर दिखाया जिसके लिए लोगों को अपना पूरा जीवन 50 भी कम पड़ता है। वर्तमान समय में ज्योतिषाचार्य पंडित अतुल शास्त्री जी का नाम भारत के ऐसे ज्योतिषाचार्यों में शामिल है, जिन्होंने बहुत ही कम उम्र में ही अपने ज्ञान और अनुभव के माध्यम से अपनी एक अलग पहचान बना ली है।

आचार्य पंडित अतुल शास्त्री को ज्योतिष विज्ञान के क्षेत्र में लगभग 10 वर्षों का अनुभव है। इन 10 वर्षों में उन्होंने अपने ज्योतिष सेवा केंद्र के माध्यम से हज़ारों लोगों का मार्गदर्शन किया है। आचार्य जी कुंडली निर्माण, कुंडली विश्लेषण, कुंडली मिलान के अलावा श्रीमद्भागवत कथा, राम कथा, रुद्राभिषेक, पूजा पाठ तथा यज्ञ अनुष्ठान के भी विशेषज्ञ हैं।

इतना ही नहीं आचार्य पंडित अतुल शास्त्री जी काल सर्प दोष, पितृ दोष, शनि की साढ़े साती, वास्तु दोष, शान्ति मंगल दोष, नवग्रह शान्ति, मूल नक्षत्र शान्ति, चांडाल दोष आदि का भी निवारण विभिन्न रत्नों एवं वैदिक कर्मकांडों के माध्यम से करते हैं। यह आचार्य जी की विशेषता है कि जो कोई उनके पास अपनी समस्याओं के साथ जाता है, वह उनकी समस्याओं को ना सिर्फ गम्भीरता से सुनते हैं बल्कि उसका 100% निवारण भी करते हैं।

प्रत्येक समस्या का समाधान वह जातक की कुंडली का निर्माण अपने हाथों से करके उसका गहन अध्ययन करते हैं और फिर समस्या अनुसार उसका उपाय बताते हैं। यही वजह है कि उनके कार्यालय में प्रतिदिन महाराष्ट्र तथा गुजरात से लेकर पूरे भारत से आनेवाले जातकों की भीड़ लगी रहती है।
जातकों की समस्या गम्भीर हो तो आवश्यकता पड़ने पर आचार्य जी फोन के माध्यम से भी समस्याएं सुनते हैं और उनका उचित निदान करते हैं। घर में किसी भी प्रकार की कोई भी परेशानियां हों, विवाह में किसी भी तरह की कोई अड़चन आ रही हो, पारिवारिक कलह हो, व्यापार में घाटा हो रहा हो, सन्तान को लेकर कोई समस्या हो या फिर बहुत मेहनत करने के बावजूद उसका सही फल नहीं मिल रहा हो तो अपनी इन विभिन्न समस्याओं के लिए आप आचार्य जी से सम्पर्क कर सकते हैं।

आचार्य जी की एक विशेषता यह भी है कि इनके बताये उपाय बहुत ही आसान तथा कम खर्चीले होते हैं, जिन्हें कोई भी आसानी से कर सकता है। तो यदि आप भी ऊपर बताये गए इनमें से किसी भी एक समस्या से ग्रसित हैं तो आज ही सम्पर्क कीजिए आचार्य पंडित अतुल शास्त्री जी से। तो फोन नम्बर या ईमेल के माध्यम से आचार्य जी से आज ही सम्पर्क करें और अपनी समस्याओं से छुटकारा पाकर खुशहाल जीवन बिताएं।

याद रखिए जीवन अनमोल है जो सिर्फ एक बार मिली है। अतः इसे व्यर्थ समस्याओं में मत बर्बाद कीजिए।
नमस्कार जय महाकाल
ज्योतिष शास्त्र के विषय में : ज्योतिष शास्त्र - एक परिचय

ज्योतिष शास्त्र एक बहुत ही वृहद ज्ञान है। इसे सीखना आसान नहीं है। ज्योतिष शास्त्र को सीखने से पहले इस शास्त्र को समझना आवश्यक है। सामान्य भाषा में कहें तो ज्योतिष माने वह विद्या या शास्त्र जिसके द्वारा आकाश स्थित ग्रहों, नक्षत्रों आदि की गति, परिमाप, दूरी इत्या‍दि का निश्चय किया जाता है।

हमें यह अच्छी तरह समझ लेना चाहिए कि ज्योतिष भाग्य या किस्मत बताने का कोई खेल-तमाशा नहीं है। यह विशुद्ध रूप से एक विज्ञान है। ज्योतिष शास्त्र वेद का अंग है। ज्योतिष शब्द की उत्पत्ति 'द्युत दीप्तों' धातु से हुई है। इसका अर्थ, अग्नि, प्रकाश व नक्षत्र होता है। शब्द कल्पद्रुम के अनुसार ज्योतिर्मय सूर्यादि ग्रहों की गति, ग्रहण इत्यादि को लेकर लिखे गए वेदांग शास्त्र का नाम ही ज्योतिष है।
छः प्रकार के वेदांगों में ज्योतिष मयूर की शिखा व नाग की मणि के समान सर्वोपरी महत्व को धारण करते हुए मूर्धन्य स्थान को प्राप्त होता है। सायणाचार्य ने ऋग्वेद भाष्य भूमिका में लिखा है कि ज्योतिष का मुख्य प्रयोजन अनुष्ठेय यज्ञ के उचित काल का संशोधन करना है। यदि ज्योतिष न हो तो मुहूर्त, तिथि, नक्षत्र, ऋतु, अयन आदि सब विषय उलट-पुलट हो जाएँ।

ज्योतिष शास्त्र के द्वारा मनुष्य आकाशीय-चमत्कारों से परिचित होता है। फलतः वह जनसाधारण को सूर्योदय, सूर्यास्त, चन्द्र-सूर्य ग्रहण, ग्रहों की स्थिति, ग्रहों की युति, ग्रह युद्ध, चन्द्र श्रृगान्नति, ऋतु परिवर्तन, अयन एवं मौसम के बारे में सही-सही व महत्वपूर्ण जानकारी दे सकता है। इसलिए ज्योतिष विद्या का बड़ा महत्व है।

ज्योतिष शास्त्र पर ज्योतिषाचार्य पंडित अतुल शास्त्री जी के विचार- :
सच तो यह है ग्रह स्वयं बोलते हैं और लोगों को लगता है कि यह ज्योतिष की भविष्यवाणी है। जन्म कुंडली आपके भूत - भविष्य - वर्तमान का दर्पण है और समस्याएं हैं तो उनका समाधान भी है।

सर्वप्रथम हमें कोशिश करनी चाहिए कि हम भूत से शिक्षा लेकर अपना वर्तमान सम्भालते हुए भविष्य को संवारें। ज्योतिष शास्त्र मात्र हमारा मार्गदर्शन करती है जैसे धूप हो या बरसात, छाता रक्षा करता है। समय सदैव एक सा नहीं रहता। ग्रह - नक्षत्र बदलते रहते हैं और उसी के साथ बदलती हैं परिस्थितियां। दशाएं अपना प्रभाव दर्शाती हैं तो आकाश में भ्रमण करनेवाले ग्रहों की भी दशा बदल जाती है।

जन्म कुंडली तो जीवन का एक स्थूल रूप है। ज्योतिष शास्त्र की विशेषता यह है कि इसके महायोग व्यक्ति को जीवन की ऊंचाइयों पर पहुंचा देते हैं तो दुर्योग व्यक्ति की भरपूर मेहनत को सफल नहीं होने देते। रही बात रत्नों की तो रत्न अमृत भी है और विष भी क्योंकि जो प्रकृति अमृत बनाती है वही विष का निर्माण भी करती है।

यह आवश्यक नहीं कि कोई भी रत्न आपके लिए लाभकारी ही हो। बहुत सम्भव है कि कई ऐसे रत्न हैं जिन्हें धारण करने के बाद आपको ऐसी हानि हो जिसकी कल्पना आपने स्वप्न में भी ना की हो। अतः रत्न धारण करने से पहले बहुत सोच विचारकर अपने विश्वासपात्र ज्योतिष की सलाह अवश्य लें। उनके बताये रास्तों पर चलकर आप अपने मार्ग में आनेवाली समस्याओं तथा बाधाओं से सावधान रह सकते हैं। यह भी सच है कि ग्रहों के दुष्प्रभाव को हमेशा के लिए समाप्त तो नहीं किया जा सकता लेकिन कम अवश्य किया जा सकता है।

अतुल शास्त्री जी के आगामी कार्यक्रम:
आज से पंडित अतुल शास्त्री जी मुम्बई में मौजूद हैं । आप अपनी समस्या के निदान हेतु आचार्य जी से सम्पर्क कर सकते हैं। सम्पर्क सूत्र -+91 9821-608066, 9821-608067(What'sapp no).

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